विश्व की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धति एवं भारत की सांस्कृतिक धरोहर आयुर्वेद जिसका उद्गम देवभूमि उत्तराखंड मे स्थित देवतात्मा हिमालय में हुआ. इसी देवतात्मा हिमालय मे अनेक ऋषि -मुनियों ने तपस्या मे लीन होकर ग्रंथों एवं पुराणों की रचना की है.
आयुर्वेद का सबसे प्राचीन,विश्व विख्यात,सर्वमान्य एवं महानतम चिकित्सा ग्रन्थ चरक संहिता है .और चरक ऋषि इस ग्रन्थ के रचनाकार ,आयुर्वेद के जनक एवं विश्व के सर्वप्रथम चिकित्सक माने जाते हैं .
चरक संहिता के १२० अध्यायों मे १२००० श्लोकों मे लगभग २००० औषध-योगों की विस्तृत व्याख्या के साथ चिकित्सा शास्त्र एवं सम्पूर्ण जीवन-दर्शन वर्णित है .लकिन आयुर्वेद के इतिहास में चरक संहिता के रचयिता एवं आयुर्वेद के जनक चरक ऋषि के अस्तित्व को लेकर लगभग २००० वर्षों से इतिहासकारों और विद्वानों के बीच विरोधाभास की स्थिति रही है.क्योंकि ऋषियों ने कभी भी अपने परिचय के सन्दर्भ मे,अपने स्थान के सन्दर्भ मे बहुत कुछ अपने ग्रंथों में वर्णन नहीं किया है.
इसलिए यदि हम उनका इतिहास , उनके कार्य स्थल , कुल ,वंश ,परम्परा इन सब विषयों को जाननें की बात करतें हैं तो,ये काफी जटिल और कठिन कार्य है . चरक ऋषि के अस्तित्व को लेकर भी अनेक मत प्रचलित रहें हैं लेकिन कोई भी निश्चित निष्कर्ष नहीं मिलता .
क्रमश;
शुक्रवार, 25 अप्रैल 2025
देवभूमि उत्तराखंड
उत्तराखंड राज्य एक ऐसा राज्य है जिसको पूरे विश्व में देवभूमि के नाम से जाना जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि-उत्तराखंड की धरती को ही देवभूमि होने का गौरव और सम्मान क्यों प्राप्त है ? क्योंकि अनादिकाल से ही यहां स्थित पर्वतराज हिमालय पर अनेक देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों का वास रहा है।
सर्वप्रथम हिमालय में ही विश्व की सबसे पुरातन सभ्यता एवं संस्कृति का उदभव हुआ है। कालांतर मे ही अन्य सभ्यताएं विकसित हुई हैं।हमारे प्राचीन वैदिक साहित्य का सृजन एवं भारतीय संस्कृति का प्रादुर्भाव भी इसी देवतात्मा हिमालय में हुआ है। इसके अनेक प्रमाण हमारे प्राचीन ग्रंथों में विद्यमान हैं। आज भी हिमालय के कण-कण मे हमारा प्राचीन इतिहास छिपा हुआ है।
- जयवीर पुण्डीर
सर्वप्रथम हिमालय में ही विश्व की सबसे पुरातन सभ्यता एवं संस्कृति का उदभव हुआ है। कालांतर मे ही अन्य सभ्यताएं विकसित हुई हैं।हमारे प्राचीन वैदिक साहित्य का सृजन एवं भारतीय संस्कृति का प्रादुर्भाव भी इसी देवतात्मा हिमालय में हुआ है। इसके अनेक प्रमाण हमारे प्राचीन ग्रंथों में विद्यमान हैं। आज भी हिमालय के कण-कण मे हमारा प्राचीन इतिहास छिपा हुआ है।
- जयवीर पुण्डीर
कान्वआश्रम -भारत के महान सम्राट भरत की जन्मस्थली
सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार ,
अतिशीघ्र ही मै आप सभी पाठक गणों के लिए एक ऐसे स्थान की जानकारी पोस्ट करने जा रहा हूँ .जिसका सम्बन्ध उस महान प्रतापी सम्राट से था जिसके नाम से हमारे देश का नाम भारतवर्ष विख्यात हुआ .यह स्थान आज तक भी इतिहासकारों की नज़र से दूर है .लेकिन यहाँ पर प्राचीन इतिहास आज भी कण-कण में बिखरा पड़ा है.
अतिशीघ्र ही मै आप सभी पाठक गणों के लिए एक ऐसे स्थान की जानकारी पोस्ट करने जा रहा हूँ .जिसका सम्बन्ध उस महान प्रतापी सम्राट से था जिसके नाम से हमारे देश का नाम भारतवर्ष विख्यात हुआ .यह स्थान आज तक भी इतिहासकारों की नज़र से दूर है .लेकिन यहाँ पर प्राचीन इतिहास आज भी कण-कण में बिखरा पड़ा है.
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