शुक्रवार, 25 जून 2010

चित्रावली - आयुर्वेद के जनक चरक ऋषि के तपस्थल चरक डांडा में उनसे जुड़े कुछ अवशेष


चरक कौन थे ?


महान ऋषि चरक कौन थे, उनका कार्यकाल क्या था और कहाँ के रहने वाले थे ? इसकी प्रामाणिक जानकारी नहीं थी . महान ऋषि चरक के अस्तित्व पर विरोधाभास को दूर करने के लिए विगत दो वर्ष पूर्व मैंने आयुर्वेद के इतिहास की अनेक पुस्तकों का गहन अध्ययन प्रारंभ किया और अनेक विद्वानों  से संपर्क किया .
प्राचीन ग्रंथों के गहन अध्ययन एवं शोध के परिणाम- स्वरुप मैंने हिमालय  की दुर्गम चोटी पर  वह स्थान खोज लिया जहाँ पर रहकर चरक ऋषि  ने  आयुर्वेद के अनेक अनुसन्धान कर चिकित्सा-विज्ञान के महान ग्रन्थ चरक संहिता की रचना की थी .
यह स्थान समुद्र तल से लगभग ७००० फीट की ऊँचाई पर स्थित है . इस स्थान को स्थानीय ग्रामीण चरक का डांडा , चरक की चोटी एवं चरक-आरण्य पर्वत आदि नामों से पुकारते हैं .यहाँ पर एक चिरयुवा बाँझ का वृक्ष है , जिसकी पूजा स्थानीय ग्रामीण चरक देवता , चरक बाबा के रूप मे करते हैं . सदियों -सदियों से यहाँ यह परम्परा चली आ रही है .चरक संहिता मे  वर्णित अनेक दिव्य-औषधियों का जो वर्णन है जिनको जड़ी -बूटी विशेषज्ञ भी आज लुप्त प्राय : मान चुके हैं वह औषधियां बड़ी सुगमता के साथ यहाँ पर मिलती हैं .
स्थानीय ग्रामीणों के पास कुछ प्राचीन दवाई  बनाने के खरल भी सुरक्षित हैं जो कभी यहाँ से इनके पूर्वजों को खुदाई मे प्राप्त हुए थे . और भी अनेक प्राचीन  भग्नावशेष चारों और विद्यमान  हैं जो ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं . अनेक ऐतिहासिक तथ्य एवं प्रमाणों के आधार पर महान ऋषि चरक कौन थे , उनका कार्यकाल क्या था और कहाँ के रहने वाले थे ? सभी अनसुलझे सवालों को दृष्टिगत  रखते हुए प्रमाणिकता के आधार पर इस अनुसन्धान को सफलता पूर्वक पूर्ण कर लिया गया है.
 आज इस खोज और अनुसन्धान ने आयुर्वेद के २००० वर्षों के इतिहास मे एक नया अध्याय  जोड़ने मे सफलता प्राप्त की है . और इस महत्वपूर्ण खोज के फलस्वरूप ही उत्तराखंड सरकार ने इस दुर्गम स्थान तक मोटर -मार्ग का निर्माण किया है. और अभी हाल ही १६ जून २०१० को  मंत्रिमंडल की बैठक मे चरक डांडा मे एक अंतराष्ट्रीय आयुर्वेद शोध संस्थान बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई . स्वयं उत्तराखंड सरकार के मुख्यमंत्री माननीय डॉ. रमेश पोखरियाल  निशंक इस स्थान को विश्वस्तरीय बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं .
 मैंने इस अभियान और अनुसन्धान पर एक पुस्तक लिखी है -चरक जन्मस्थली पर आधारित एक प्रामाणिक शोध जिसका प्रकाशन चौखम्भा वाराणसी  द्वारा किया गया . और  साथ ही एक वृतचित्र   चरक -एक खोज    का निर्माण किया है . जिससे आयुर्वेद मे रूचि रखने वाले व्यक्ति एवं अन्य जिज्ञासु व्यक्तियों को सम्पूर्ण घटनाक्रम की जानकारी प्राप्त हो सकें .